Tuesday, 31 December 2013

स्वागत ..नवागत !!




डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 


नवागत
स्वागत करूँ
तुम्हारा अभिनन्दन !
अक्षत आशा ,विश्वासों का
ले कुमकुम चन्दन
रहें सुवासित पवन
जल निर्मल ,
हो निष्कंप धरा
कभी न उमड़े सागर
मन में पीर भरा
याचित यही
मुरझाये मन और नयन को
दे मोती सी आब
रहें न वंचित
नन्हे कर को
देना कलम-किताब
कर स्वीकार ,समय-नंदन !!!

सब प्रकार से स्वस्थ ,सुन्दर ,मंगलमय नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ........
ज्योत्स्ना शर्मा 


Monday, 16 December 2013

श्रद्धांजलि ...निर्भया !

                             

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

1
देकर ...
किरणों से ...
थोडा  सा तेज ..
थोड़ा सा  रूप ..
बना दो न दिनकर ..
मुझ को भी ....धूप ..

2
दीप्त दामिनी सी रह - रह कर अपना भान  कराती जाना ,
मधुर कण्ठ से मृदुल सुकोमल स्वरमय तान सुनाती जाना |
अस्तित्व मिटे न भीड़ भरे... इन चौराहों पर कहीं तुम्हारा ;
नारी बन अंगार अलग स्वयं की पहचान बनाती जाना ......

-0- सत्यं , शिवम् ,सुन्दरम् के सृजन के लिए ..और ..अमंगल के दहन के लिए यह अग्नि सदैव जीवित ..जाग्रत रहे ऐसी कामना के साथ ...
...सजल नयन ...श्रद्धांजलि ...निर्भया !

------------०००००००-----------
 ( चित्र गूगल से साभार )


Friday, 13 December 2013

तोलो फिर कुछ बोलो ।

डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
1
कवि ऐसे मत डोलो
अर्थ अनर्थ करे
तोलो फिर कुछ बोलो ।
2
क्या बात लगी करने
बादल से धरती
फिर पीर लगी झरने ।
3
देंगें तो क्या देंगें
ग़म के शोलों को
वो सिर्फ हवा देंगें ।
4
अब यूँ न विचर तितली
धूप यहाँ ...दिन में !
कल डर-डर कर निकली ।
5
ऐसे न किरन हारी
जीत गई तम से
सूरज था सरकारी ।
6
उफ़ !आज हुआ बेकल
सुन-सुन के सागर
ये नदिया की कल-कल ।

-0-

Thursday, 5 December 2013

एक प्रयास .....

                                      चित्र गूगल से साभार
डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 


अभी हसरतें निकली भी न थीं घर से,
नज़र आ गईं ...देखो मिलने नज़र से ।

वतन की महक से ....महकता परिंदा ,
कई बीज लेकर......उड़ा था शज़र से ।

खयालों ने मुझसे...कहा रोककर कल ,
कभी हमको देखो ग़ज़ल की नज़र से॥

कई प्रश्न ढलती .............उमंगों ने पूछे ,
निकालेंगें कैसे अब बिटिया को डर से ।

नहीं रब से कोई .....हमें आज शिकवा ,
बरसना है जैसे वो......जी भर के बरसे ।

चले आए तेरी...........मर्जी से मालिक ,
बता तू ही लौटेंगे कब हम सफ़र से ।

रखो ऐसी तासीर......बातों में , हर शै ,
उठे हो के रौशन.......सदा तेरे दर से ।


.........@@@@@.............

Wednesday, 13 November 2013

बाल दिवस : एक आयोजन !!

डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 


:)
चारों ओर चुनावी चर्चे ,
माँ ! हम अपना फ़र्ज़ निभाएं |
कौन पार्टी 'आमों ' वाली ;
थोड़े आम चलो ले आएँ .....शुभ बाल दिवस !!!


और एक आयोजन यह भी ...
१ 
उन्होंने ...
बाल दिवस ...
कुछ इस तरह मनाया 
आला ब्युटीशियन से 
तिनका तिनका बालों का 
ख़ूबसूरत ...
हेयर स्टाइल बनवाया !
२ 
उन्होंने ...
बाल दिवस पर 
बाँट कर 
शब्दों की मिठाई 
नन्हें रामू की 
खूब फटकार लगाई..
क्यों रे ....तुझे अब तक 
कार धुलनी न आई !
३ 
उसने कहा ' माँ '
आज बाल दिवस.....
 इस तरह मनाना 
आप आज मुझे 
अकेले मत सुलाना !

~~~~@@@~~~~
सभी चित्र गूगल से साभार 
ज्योत्स्ना शर्मा 

बाल साहित्य विशेषांक से

डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 
यादे बचपन की…जब आती हैं ...कविता बन जाती हैं, कुछ इस तरह 

मेरी रचनाएँ ..'अभिनव इमरोज़ ' के बाल साहित्य विशेषांक से ...

प्यारा भैया 
भैया बहुत सताये मुझको 
चोटी खींच रुलाये मुझको 
गुड़िया मेरी छीने भागे 
पीछे खूब भगाये मुझको 

मेरी पुस्तक रंग उसके हैं 
खेलें कैसे ढंग उसके हैं 
क्या खाना है क्या पहनाऊँ
नये नये हुड़दंग उसके हैं 

फिर भी तुमको क्या बतलाऊँ
प्यार उसी पर आये मुझको 
मेरा प्यारा न्यारा भैया 
कभी दूर ना भाये मुझको


2-

प्यारी गौरैया 



ओ मेरी प्यारी गौरैया 
रोज़ मेरी खिड़की पर करती 
फुदक फुदक कर ताता थैया 

कितनी सुबह सुबह जग जाती 
तुम मीठे सुर साज़ सजाती
बजे अलार्म भले न मेरा 
मुझे समय से आन जगाती
तुम ना हो तो फिर पक्का है 
कान खिंचें और मारे मैया 

छुट्टी के दिन सोने देना 
सुख सपनों में खोने देना 
देखो बात न बढ़ने पाये 
बहुत देर मत होने देना 
दाना पानी दूँगी तुमको 
मान करूँगी सोन चिरैया !

 ~~**~~

Saturday, 2 November 2013

*****शुभ दीपावली *****

                                  चित्र गूगल से साभार 
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

तिमिर घना हो भले,तारों की ज़रा न चले ,
सूझे नहीं पथ तो......दिए सा जल जाएँगें  |
भाव कटु दूर करें.........जीवन में रस भरें ,
बोंएँ बीज प्रीत के..........मधुर फल पाएँगें |
लालसा है लेने की जो,देना भी तो सीख लेना ,
ध्यान धरें चरण...........विघन टल जाएँगें |
हृदय की है चाह यही......अब उत्साह यही ,
ज्योति कब प्रेम की.......जगत में जलाएँगें ||

देखिए तो हर ओर........बहुत हुआ है शोर ,
कारा भला तम की.....ये कैसे कट पाएगी |
शुचिता होवे मन की.....पावनता लगन की ,
स्नेह से भरो न दीप........पीर घट जाएगी |
खिली खिली फुलझड़ी.....लेकर जादुई छड़ी,
ये न सोच कोई परी..........तेरे घर आएगी |
खीलों व खिलौनों की मिठास आसपास बाँट,
सदय हो समृद्धि.........सब संग मुस्काएगी ||

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Monday, 21 October 2013

शुभ करक चतुर्थी !!


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

मेरी दुआएँ 
सजनी सदा संग 
पिया का पाएँ |१ 

हों दीर्घ आयु 
सफलता के ऊँचे 
शिखर पाएँ |२ 

शृंगार मेरा 
तेरी याद कजरा 
प्रीत मेहंदी |३ 

लाज चूनर 
उमंगों के कंगन 
अर्घ प्रेम का |४ 

सौभाग्य माँगू
खुशियों की पायल 
बजती रहे |५ 

सुनो न चाँद 
मैं तो बस हो रहूँ 
तेरी चाँदनी |६ 

न आँसू तुम 
कजरा भी नहीं हो 
नैनों में बसे |७ 

हैं तो तुम्हारी 
बस मुझको प्यारी 
सुधियाँ सारी |८ 

सुख अपार 
जीवन में भरा हो 
प्यार ही प्यार |९ 

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Thursday, 17 October 2013

सुधा बरसती शारदी !!

                                                                चित्र :गूगल से साभार
डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 

सुधा बरसती शारदी , शीतल ,सुन्दर रात ,
अद्भुत ,वाणी से परे , पावनता की बात |
पावनता की बात  , साँवरा रास रचाए ,
दर्प भरे कन्दर्प  , मात कान्हा से खाए |
संग राधिका श्याम,निरख मन कली सरसती ,
सुन वंशी की तान  , लगे ज्यूँ सुधा बरसती ||

शरत् पूर्णिमा की रात काम को भी जीत लेने वाले मेरे कान्हा सभी के मन को मधुरता और पवित्रता से परिपूर्ण करें .....जय श्री कृष्णा !!

................ज्योत्स्ना शर्मा 

Monday, 7 October 2013

माँ धरणी सम धारिणी !!




                               चित्र गूगल से साभार 
डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 


मैया जीवन दायिनी ,सब सुख का आधार ,
माँ धरणी सम धारिणी ,माँ नभ सा विस्तार |
माँ नभ सा विस्तार ,स्नेह की अविरल धारा ,
प्रतिपल मन की चाह ,थाम लें हाथ तुम्हारा |
हमें उतरना पार ,  नाव की बनें खिवैया ,
जग की पालनहार , हे वरदायिनी मैया ||

मैंने कुछ बोला नहीं, रहे अधर बस मौन,
फिर मेरे मन की दशा, भला बताए कौन।
भला बताए कौन  , दिलासा दे जाती हो,
देकर सरल निदान, विघ्न सब ले जाती हो।
संस्कार किए भेंट  , मुझे सुन्दर से गहने,
माँ तेरे उपहार  , मान से पहने मैंने ||

माँ कहते ही आ गई ,फिर मुख पर मुस्कान ,
मुकुलित है मन की कली ,हुए उमंगित प्राण |
हुए उमंगित प्राण , याद जब तेरी आए ,
सुमना सी मन वास ,साँस मेरी महकाए |
संग सखी सी आप ,सदा रहती मेरे हाँ ,
आया क्या ना याद ,मुझे बस कहते ही माँ !!


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Sunday, 22 September 2013

.बहुत शुभ कामनाएँ ..प्यारी बेटियों को !!



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

सब मुझको मीठी कहते हैं 
माँ कहती है कम बतियाओ ।

मेरी फ्रॉक बड़ी ही सुन्दर
माँ कहती है कम इतराओ ।
पापा कहते परी हूँ उनकी
माँ कहती है मुँह धो आओ ।

बच्चे कहते आओ खेलें
माँ कहती है पढ़ने जाओ ।

फास्ट फ्रेंड से हुआ है पंगा
माँ कहती है भूल भी जाओ ।


मेरी गुड़िया सोई न अब तक
माँ कहती है अब सो जाओ ।

आँख में आँसू देखे बोले
गले लगा लूँ पास तो आओ ।

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Saturday, 14 September 2013

शुभ हिंदी दिवस !!


डॉñ ज्योत्स्ना शर्मा
1
मन वीणा में वास हो ,दिशि दिशि गुंजित गीत ।
बरसे रस हिंदी सदा , बजे मधुर संगीत ।।
2
गूँथे सबको हार में ,तेरे रूप अपार ।
हिंदी आँचल में भरे ,जैसे माँ का प्यार ।।
3
शब्दों के मोती भरे ,भाव भरा संसार ।
जननी संस्कृत से सदा ,संयोजित हैं तार ।।
4
उड़ने को आकाश है ,डूबे गहरा नीर ।
भक्ति ,प्रेम ,परिहास है ,हिंदी मन की पीर ।।
5
पूरब से पश्चिम चले ,हिंदी मधुर बयार ।
उत्तर -दक्षिण हिन्द हो ,समाहार ,बलिहार ।।

-0-

Sunday, 8 September 2013

शुभ गणेश चतुर्थी !!!

डॉ ज्योत्स्ना शर्मा 

गूगल से साभार
हे पार्वतीनन्दन! प्रभु ,इतनी विनय गणेश !
दूर करें संसार के ,विघ्न ,कष्ट सब क्लेश।।


संग हँसे ,रोयें सदा ,नहीं मिलन की रीत ।
प्रभु मेरी तुमसे हुई ,ज्यों नैनन की प्रीत॥


खुशबू के मिस फूल ने ,भेज दिया सन्देश ।
 हाल हमारा देखने , आओ तो इस देश


घोटालों के दौर में , यही हमारी माँग ।
घोट- घोट कर हम पियें,प्रभु सुमिरन की भाँग ।।


नशा आपके नाम का , खूब कटेगी रात ।
मेरा मन करता रहे , उनके मन की बात ।।

सादर नमन वंदन ......हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ...


ज्योत्स्ना शर्मा 

Thursday, 5 September 2013

मन का तार सितार हुआ है .....

चित्र :गूगल से साभार
 
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

मन का तार सितार हुआ है ,
गीतों से....गुलज़ार हुआ है ।

ग़म अपनाए खुशियाँ बाँटीं ,
मत कहिये व्यापार हुआ है ।

माना राहें....बहुत कठिन हैं ,
अब चलना...दुश्वार हुआ है ।

बहुत अँधेरा...दीप जला लें ,
देखें...अब उजियार हुआ है ।

सतत दया हो जो प्रभु तेरी ,
बन्दा भव से....पार हुआ है ।

बोलें तो.........ऐसा वो बोलें ,
वाणी का......शृंगार हुआ है ।

हम हिंदी हैं ...एक लगन है ,
हमें वतन से...प्यार हुआ है ।

-0-