Friday, 16 December 2016

सीखे हैं सबक हमने .........

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

रूठे हैं जो क़िस्मत के तारों के बहाने से
वो मान भी जाएँगे थोड़ा सा मनाने से

तन्हाई से घबरा के निकले थे सुकूँ पाने
गम ले के चले आए ख़ुशियों के घराने से

सीता तो हुई रुसवा ,मीरा को विष, अब भी
कृष्णा ये कहे ठहरो ! बाज़ आओ सताने से

सागर के सीने में एक आग भी होती है
भड़के तो कहाँ साथी ! बुझती है बुझाने से

हारेंगे न बैठेंगे कोई लाख जतन कर ले
सीखे हैं सबक़ हमने उस्ताद ज़माने से !

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(चित्र गूगल से साभार)

Wednesday, 14 September 2016

मन हिंदी मुस्काई !




डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

बरस बीतते एक दिवस तो
मेरी सुध आई
मन हिन्दी  मुस्काई ।

गिट-पिट बोलें घर बाहर सब
नाती और पोते
नन्ही स्वीटी रटती टेबल
खाते और सोते
खूब पार्टी घर में अम्मा
बैठी सकुचाई
मन हिन्दी  मुस्काई !

ओढ़े बैठे अहंकार की
गर्द भरी चादर
मान करें मदिरा का छोड़ी
सुधामयी गागर
पॉप,रैप  के संग डोलती
बेबस कविताई
मन हिन्दी  मुस्काई !

अपनों में अपनापन लगता
झूठा- सा सपना
कहाँ छोड़ आए हो बोलो
स्वाभिमान अपना
गौरव गाथा दीन-हीन की
जग ने कब गाई
मन हिन्दी  मुस्काई !

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(चित्र गूगल से साभार )

Wednesday, 24 August 2016

जादूगर कैसे हो !







डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

1
उमड़ेफिर बरस गए
ये नैना कान्हा
दर्शन को तरस गए ।
2
दर्पण से धूल हटा
झलक उठे मन में
मोहन की मधुर छटा ।
3
दिल खूब चुराता है
लाल यशोदा का
फिर भी क्यों भाता है ।
4
दाऊ के भैया ने
सबको त्राण दिया
उस नाग-नथैया ने ।
जादूगर कैसे हो
जो जिस भाव भजे
उसको तुम वैसे हो ।
6
इक राह दिखाई है
मीत सुदामा के
क्या रीत निभाई है।
7
मन उजला तन काला
मोह गया मोहन
मन, बाँसुरिया वाला ।
8
मुख अमरित का प्याला
कितनी छेड़ करे
यह नटखटगोपाला !
9
भोली -सी सूरत पे
रीझ गई रसिया
मैं प्यारी मूरत पे ।
10
भक्तों को मान दिया ।
मोह पड़े अर्जुन
गीता का ज्ञान दिया ।

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(चित्र गूगल से साभार ) 

Sunday, 14 August 2016

शुभ स्वतन्त्रता दिवस !

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

खूब सजाना जनतंत्र के चारों ही आधारों को ,
और सज़ा देनी है पहले भीतर के ग़द्दारों को
नाहक छेड़ करें ना दम्भी  ,दूध छठी का याद करें
पाठ पढ़ाना है कुछ ऐसा उन कुटिलों ,मक्कारों को।।1

अभिलाषा है आज लेखनी,सरस मधुर रसधार बने
वक़्त पड़े तो खूब गरजती वीरों की हुंकार बने
करके अर्चन अरिमुण्डों से जननी का शृंगार करें
भीतर बाहर के घाती को दोधारी तलवार बने ।।2
         
पूरे करने हैं जननी के, सपने,  सब अरमान हमें
उसकी ख़ुशियों पर करने हैं अपने सुख क़ुर्बान हमें
बोस,जवाहर,गाँधी बिस्मिल नाज बहुत हमको तुमपर
सिंह भगत ,आज़ाद ,याद हैं वीरों के बलिदान हमें।3

Friday, 8 April 2016

शुभ कामनाएँ !



नव संवत्सर, गुडी पाडवा ,चेटी चण्ड एवं उगादी पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएँ !
-डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा  
मेरे घर से आप का , यूँ तो घर है दूर 
मगर दुआ के पेड़ हैं, छाया ,फल भरपूर 

माँ मंजूषा स्नेह की , माँ ममता की खान 
संचित शत सद्कर्म से ,मिले भक्ति वरदान 

जन्मा,पाला,दंड दे, दिया सुघड़ मन, वेश 
माँ तुझमें तीनों बसे ,ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश 

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                    (चित्र गूगल से साभार )

Tuesday, 22 March 2016

ये फागुन के रंग !



होली की हार्दिक शुभ कामनाएँ !
             -डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

प्रगटे मनु तिथि पूर्णिमा ,उत्सव हुआ अपार 
जगती के प्रारम्भ का ,वासंती त्योहार ।।1

कहाँ क्रूर अति पूतना ,कहाँ सुकोमल श्याम 
अद्भुत लीला आपकी ,हर्षित गोकुल धाम ।।2

इत हाथों में लाठियाँ ,उत है लाल गुलाल 
बरसाने की गोपियाँ ,नन्द गाँव के ग्वाल ।।3

दहे होलिका वैर की ,खिले प्रेम प्रह्लाद 
सदय दृष्टि प्रभु की रहे ,बरसे बस आह्लाद ।।4

बड़ा दही-कर छोड़कर ,कांजी संग मुस्काय 
रसगुल्ले का ले गई ,गुँझिया हृदय चुराय ।।5

बस भल्लों की भूख है,ठंडाई की प्यास ।
घुमा फिरा कर मन बसे,गुझिया की ही आस ।।6

शक्करपारे चट हुए ,कम लगते पकवान ।
बना-बना कर हो गई ,माँ कितनी हैरान ।।7

दरवाज़े की ओट में ,टिकुआ खड़ा उदास ।
जाए ख़ाली हाथ क्या , अब बच्चों के पास ।।8

देख सयानी बेटियाँ ,किसका रंग गुलाल  
कैसे पीले हाथ हों ,सोचे दीन दयाल ।।9

नथनी , कंगन बेचकर , ले आया सामान ।
रमुआ के मन में बसी ,बिटिया की मुस्कान ।।10

सिंधारे में भेज दूँ , साड़ी संग गुलाल ।
बिटिया का सुख सोच कर ,मैया हुई निहाल ।।11

सीधे-साधे की हुई , आड़ी-तिरछी चाल । 
होली तेरे रंग ने , कैसा किया कमाल ।।12

भेदभाव सब मिट गए , खोई है पहचान ।
रंग लगाएँ शौक़ से , ज़रा लगाकर ध्यान ।।13 

एक वेश-परिवेश सब ,रंग-उमंगों डूब 
गले मिलन रसिया चले ,हुई धुलाई खूब ।।14

देखभाल कर कीजिए,रंगों का उपयोग ।
सुघढ़ ,सलोनी देह को,लगे न कोई रोग ।।15

धानी-पीली ओढ़नी ओढ़ धरा मुस्काय ।
रंग बिखेर कर ,सूरज भागा जाय ।।16

बौराया मौसम हुआ , पवन करे हुड़दंग ।
पागल मनवा माँगता,सदा तुम्हारा संग ।।17

बहे पवन सद्भाव की , चढ़े प्रेम की भंग  
खुशियों की वर्षा करें ,ये फागुन के रंग ।।18

तन-मन सारे रँग गए ,खूब चढ़ा ली भंग 
कैसे भूलूँ भारती ,मैं केसरिया रंग ।। 19

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(चित्र गूगल से साभार )

Monday, 7 March 2016

महकी कस्तूरी !

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

बिटिया आँगन की कलीउपवन का शृंगार |
महकी कस्तूरी हुई, महकाए संसार  ||

छू लेना आकाश मन ,रख मिट्टी का मान | 
तुम्हें धरा पर स्वर्ग का, करना है संधान ||

कहीं धूप अंगार सी, कहीं मिलेगी छाँव |
काँटे भी है राह में , सखी ! सँभल रख पाँव ........

.बहुत शुभ कामनाएँ !!

(चित्र गूगल से साभार )



Wednesday, 6 January 2016

नम नयनों से नमन करूँ माँ ऐसे राजदुलारों को ...



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

दंड अभी देना है पक्का ,सरहद के हत्यारों को
उससे पहले ढूँढो ,ठोको ,भीतर के ग़द्दारों को 
दुश्मन के सब वार भारती झेल तिरंगा ओढ़ लिया
नम नयनों से नमन करूँ माँ ऐसे राजदुलारों को ...

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दीप कभी क्या गर्वित हो सूरज से आँख लड़ाता है
उद्दण्ड पवन के झोंकों से क्या पर्वत झुक जाता है 
सवा अरब हतभागी कब तक किस किस से अपमान सहें 
चुल्लू भर पानी सागर की लहरों को धमकाता है ....


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(चित्र गूगल से साभार )